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बुधवार, 6 नवंबर 2024

"मनिहारी में छठ पूजा: आस्था, संगठित व्यवस्था और श्रद्धा का अद्वितीय मिलन"

Manihari

मनिहारी बिहार राज्य के कटिहार जिले का एक प्रमुख स्थल है, जो विशेष रूप से छठ पूजा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बन जाता है। यहाँ हर साल गंगा स्नान के लिए श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं। छठ पूजा के समय, मनिहारी घाट पर श्रद्धालुओं का तांता लगता है और यहां गंगा नदी में स्नान करने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। मनिहारी गंगा के किनारे स्थित एक प्रमुख घाट है, जहाँ श्रद्धालु छठ पूजा के पहले दिपवली के बाद छठ पूजा के नहाय-खाय के दिन तक गंगा स्नान करते हैं।


मनिहारी में श्रद्धालुओं की भीड़

मनिहारी में छठ पूजा के दौरान विशेष रूप से गंगा स्नान के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुँचते हैं। यहाँ तक कि जोगवनी, नेपाल, मधेपुरा, सहरसा और अन्य आसपास के इलाकों से भी लोग मनिहारी आते हैं। मनिहारी गंगा घाट पर स्नान करने के बाद, लोग सूर्य देवता को अर्घ्य अर्पित करते हैं और पूजा करते हैं।


यातायात की व्यवस्थाएँ

छठ पूजा के दौरान, मनिहारी आने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए, रेलवे और रोड ट्रांसपोर्ट दोनों के माध्यम से श्रद्धालुओं की यात्रा के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की जाती हैं। 


1. रेल यातायात: रेलवे प्रशासन द्वारा छठ पूजा के दौरान विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की जाती है, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु आसानी से मनिहारी पहुँच सकें। मनिहारी स्टेशन पर श्रद्धालु बड़ी संख्या गंगा स्नान के लिए आते हैं, जिसके लिए रेलवे प्रसाशन के द्वारा अतिरिक्त रेलवे सुरक्षा बल, अतरिक्त टिकट काऊंटर तथा साफ़ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है।


2. सड़क यातायात: सड़क मार्ग से भी श्रद्धालुओं का आगमन होता है। इस दौरान राज्य सरकार और नगर पंचायत मनिहारी यातायात की व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और यातायात कर्मियों की तैनाती करते हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो। 


सुविधाएँ और सुरक्षा व्यवस्था

मनिहारी में लाखों श्रद्धालुओं के आने के कारण, स्थानीय प्रशासन और नगर पंचायत विशेष सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था सुनिश्चित करते हैं। 

  • जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं।
  • विशेष गश्ती दलों को भी तैनात किया जाता है, ताकि सुरक्षा का माहौल बनाए रखा जा सके।
  • गंगा में बैरिकेटिंग की व्यवस्था कि जाती है। बैरिकेटिंग से श्रद्धालुओं को नदी में डुबकी लगाने या स्नान करने के दौरान सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। यह सुनिश्चित करता है कि लोग गहरे पानी में न जाएं या नदी के खतरनाक हिस्सों में प्रवेश न करें।

  • पानी, स्वच्छता और सुरक्षा: स्थानीय प्रशासन द्वारा स्नान घाटों पर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है और असुविधा से बचने के लिए आवश्यक सुविधाएँ जैसे शौचालय, पानी की टंकियाँ, और साफ-सफाई का प्रबंध किया जाता है।

    मदद और स्वास्थ्य सुविधाएँ: श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए वहां अस्थायी अस्पताल और एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाती है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान की जाती है।

    पुलिस और यातायात व्यवस्था: सुरक्षा को लेकर पुलिस का कड़ा प्रबंध किया जाता है। दुर्घटनाओं से बचने और श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की जाती है। साथ ही, नगर पंचायत द्वारा यातायात के लिए स्पष्ट मार्गनिर्देश और ट्रैफिक जाम से बचने के लिए मार्गों का प्रबंध किया जाता है। गंगा घाट पर पुलिस बल के साथ-साथ एन०डी०आर०एफ़० के टीम को भी लगाया जाता है। गंगा स्नान करने वाले     


    मनिहारी को छठ पूजा के समय विशेष प्राथमिकता मिलने का मुख्य कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या है। कटिहार जिला प्रशासन और रेल प्रशासन द्वारा समय-समय पर की जाने वाली व्यवस्थाएँ, जैसे विशेष ट्रेनों का संचालन, यातायात की निगरानी, स्वच्छता, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ, यह सुनिश्चित करती हैं कि श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के अपने धार्मिक अनुष्ठान को पूरी श्रद्धा के साथ सम्पन्न कर सकें। इन प्रयासों से छठ पूजा के दौरान मनिहारी में होने वाली भारी भीड़ को संभालने में मदद मिलती है और श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर पाते हैं।

    मंगलवार, 5 नवंबर 2024

    छठ पूजा का इतिहास ,महत्व और पूजन विधि

    Manihari

    छठ पूजा एक प्राचीन और महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है, जो विशेष रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, और नेपाल के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। यह पूजा सूर्य देवता और उनकी पत्नी उषा (प्रभा) की पूजा है, और इसे खासकर कार्तिक माह (अक्टूबर-नवंबर) के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी और सप्तमी को मनाया जाता है। यह पर्व एक सप्ताह तक चलता है, जिसमें मुख्य दिन छठी (छठ) होती है।


    छठ पूजा का इतिहास:

    छठ पूजा का इतिहास बहुत प्राचीन माना जाता है। यह पर्व सूर्य देवता और उनकी ऊर्जा की पूजा से जुड़ा हुआ है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, छठ पूजा की शुरुआत महाभारत काल से मानी जाती है। जब पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान सूर्य देवता की पूजा की थी, तब से यह परंपरा चली आ रही है।

    एक और प्रमुख मान्यता है कि छठ पूजा का संबंध राजा रघु से भी जोड़ा जाता है, जो सूर्य देव के भक्त थे और उन्होंने सूर्य देवता की पूजा से अपनी प्रजा को सुखी और समृद्ध किया। इसके अलावा, एक अन्य मान्यता यह भी है कि यह पूजा प्राचीन काल में एक विशेष दिन के रूप में आयोजित होती थी जब लोग सूर्य के उगने और अस्त होने के समय विशेष रूप से पूजा करते थे, ताकि उनकी उर्जा और आशीर्वाद प्राप्त किया जा सके।

    छठ पूजा का महत्व:

    1. सूर्य देवता की पूजा:

       छठ पूजा का मुख्य उद्देश्य सूर्य देवता की पूजा करना है, जिन्हें जीवन और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। सूर्य देवता से स्वास्थ्य, समृद्धि, और खुशहाली की कामना की जाती है। पूजा के दौरान, सूर्योदय और सूर्यास्त के समय विशेष पूजा की जाती है, जो सूर्य के प्रति श्रद्धा और आभार व्यक्त करने का तरीका है।

    2. परिवार और समाज की भलाई:

       छठ पूजा का महत्व केवल व्यक्तिगत कल्याण के लिए नहीं है, बल्कि यह समाज और परिवार के कल्याण के लिए भी मनाई जाती है। यह पूजा समाज में भाईचारे, प्रेम और एकता का प्रतीक मानी जाती है। परिवार के सदस्य मिलकर यह पूजा करते हैं, जिससे रिश्तों में गहराई और प्रेम बढ़ता है।

    3. स्वास्थ्य और जीवन की लंबाई:

       छठ पूजा को जीवन के स्वास्थ्य और लंबाई की कामना से भी जोड़ा जाता है। विशेष रूप से, महिलाएं इस पूजा में भाग लेती हैं और यह माना जाता है कि इस पूजा के माध्यम से वे अपने परिवार की खुशहाली और बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

    4. प्राकृतिक तत्वों के साथ जुड़ाव:

       छठ पूजा में सूर्य के साथ-साथ जल, पृथ्वी, और आकाश के तत्वों की पूजा की जाती है। भक्त विशेष रूप से नदी, तालाब या अन्य जल स्रोतों में स्नान करते हैं और वहां सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह प्राकृतिक तत्वों के प्रति सम्मान और उनके महत्व को दर्शाता है।

    छठ पूजा की प्रक्रिया:

    1. नहाय खाय (पहला दिन):

       छठ पूजा की शुरुआत "नहाय खाय" से होती है। इस दिन, भक्त शुद्धता के लिए स्नान करते हैं और विशेष रूप से शाकाहारी भोजन खाते हैं, जिसमें लौकी, और कद्दू प्रमुख होते हैं।

    2. खरना (दूसरा दिन): 

       दूसरे दिन को खरना कहा जाता है, जिसमें दिनभर उपवासी रहकर शाम को गुड़, चावल बने पकवान खाते हैं। इस दिन को मुख्य रूप से व्रति अपने परिवार के साथ मिलकर पूजा करती हैं।

    3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन): 

       तीसरे दिन, सूर्यास्त के समय पूजा की जाती है, जिसमें भक्त सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इस समय भक्त नदी या तालाब के किनारे एकत्र होते हैं और सूर्यास्त से पहले व्रति सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

    4. उषा अर्घ्य (चौथा दिन):

       चौथे दिन, उषा (सूर्योदय) के समय सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है। यह दिन पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है, और इसे पूरा करने के बाद व्रति अपना व्रत समाप्त करते हैं।

     

    गुरुवार, 6 अगस्त 2020

    मनिहारी नगर पंचायत में 07 से 16 अगस्त तक लगाए जाएंगे कोरोना जांच कैंप।

    Manihari
    कोरोना के बढ़ते रफ़्तार एवं कोरोना के कड़ी को तोड़ने के उद्देश्य से मनिहारी नगर पंचायत के विभिन्न वार्डों में दिनांक 07 अगस्त से 16 अगस्त 2020 तक कोरोना जांच सेन्टर खोले जा रहे हैं, कृपया अपने वार्ड के जांच केंद्र में दिए गए लिस्ट के अनुसार जाकर अपना जांच अवश्य करायें ।

    शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010

    साल के अंत होते-होते मनिहारी को भारतीय रेल द्वारा मिला उपहार

    Manihari

    (30 दिसंबर 2010) साल के अंत होते-होते मनिहारी को भारतीय रेल द्वारा मिला उपहार! यह दृश्य जो आप देख रहें हैं यह कहीं और का नहीं बल्कि मनिहारी का है, जहाँ साल भर से रेल परिचालन बंद है! सालभर से भी अधिक रेल बंद होने के बाद यहाँ अब जोर-सोर से काम चल रहा है! काम के रफ़्तार को देखकर यह लगता है क़ि अब वो दिन दूर नहीं है जब मनिहारी में फिर से रेल का परिचालन शुरू हो जायेगा! हम आपको यह बता दें क़ि मनिहारी में पहले छोटी लाइन थी, जिसमे रेल चलती थी! लेकिन पिछले साल ही यहाँ छोटी लाइन से बड़ी लाइन बनाने के लिए रेल परिचालन को बंद किया गया था, लेकिन अब लगता है क़ि बहुत जल्द ही यहाँ रेलगाड़ी दौड़ने लगेगी! जिसके पहल में आज यहाँ पहली बार बड़ी लाइन का इंजन चलाया गया! इंजन आने के बाद यहाँ मनिहारी वासियों में एकबार फिर से खुशी क़ि लहर दौर गयी क़ि अब बहुत जल्द ही यहाँ रेलगाड़ी चलने लगेगी! जहाँ एक ओर मनिहारी क़ि जनता में खुशी देखी गयी वहीं इंजन लाने वाले लोको-पायलट तथा काम करने वाले मजदूरों में भी ख़ुशी देखी गयी! इस इंजन को देखने बच्चे-बूढ़े, महिलाएं तथा सभी वर्ग के लोग यहाँ आये थे यहाँ देखकर ऐसा लगता था मानो मेला लगा हो ! युद्ध स्तर से कार्य होने के बाद अब यह देखना है क़ि मनिहारी में रेलगाड़ी का परिचालन कब से शुरु होती है! देखा जाए तो लगभग काम पूरा ही हो चूका है! 
                                                                                                    
                                      

    बुधवार, 17 नवंबर 2010

    गोगाबील झील - पक्षी विहार

    Manihari
    गोगाबील झील कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड से 8 क़ि० मी० दूर स्तिथ है। इस पक्षी विहार में धनुषाकार झील (ox-bow lake) है, जिसका नाम गोगाबील है उसी के नाम पर इस पक्षी विहार का नामांकरण हुआ। 1990 ई० में  यहाँ आने वाले पक्षियों की बड़ी  संख्या को देखकर इसे पक्षी विहार घोषित किया गया। 

    झील 
                  इसका क्षेत्रफल 217.99 एकड़ है।  इस झील के चौहद्दी इस प्रकार हैं।  पूरब में बनगंवा, पश्छिम में मरुआ(भेड़ीयाही), उत्तर में नीमा, एवं दक्षिण में सुरापारटाल है। इस झील क़ि सबसे बड़ी बात यह है की यहाँ रूस तथा अन्य देशो से लगभग 300 प्रकार के पक्षी यहाँ पहुचते  है। लाल रीवाले ग्रीव, पोटचार्ड, स्पाटवील, टील, कूट और ब्रहुमानी हंस प्रमुख हैं। 
    बगुला के प्रजातियाँ 
        
    यहाँ की देखरेख करने के लिए C.G GUARD मो० सीताउद्दीन को नियुक्त किया गया है।  वे सुरापार टाल  के  निवासी हैं। 1995 से इनको जन-लक्ष्य  संस्था विनोदपुर (कटिहार) के द्वारा कार्य पर लगाया गया है।  750 रु प्रतिमाह आने जाने का किराया तथा इनको और इनके परिवार वालों को मेडीकल की सुविधा उपलब्ध है।  जब हमारे टीम ने इनसे बात की तो इन्होने बताया की इनको झील के पास निगरानी रखने के लिए एक आवास तथा नाव की जरूरत है। इनका कहना है की घर से आने जाने में बहुत दिक्कत होती है।  इनके यहाँ न होने पर लोग मछलिया भी मारने लगते हैं जिससे यहाँ आने वाले पक्षी हरककर भाग जाते हैं। जिससे पक्षियों की संख्या में कमी हो जाती है।  
    बनभोज करते लोग 
                  हरेक महिना यहाँ एक बार भागलपुर से पानी जांचकर्ता आतें हैं। अपनी जांच  प्रक्रिया के दौरान वे पुरे झील का सर्वेक्क्षण करते हैं और सर्वेक्षण करने के पश्चात वे पुनः चले जातें हैं। मो० सीताउद्दीन जी से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया की जनवरी, फ़रवरी, मार्च , अप्रेल में पक्षियों की कलरव मन को अति प्रशन्न कर देता है।पक्षियों की इतनी अनेक प्रकार और संख्या शायद ही कहीं देखने को मिलता हो। वे पक्षियों के पूरा नाम ही हमें बता दिए जिनमे  से हम कुछ नाम यहाँ लिख रहे हैं। लालसार , पेंटल, पचार, डोकहर, बड़ा सिलिक, छोटा सिलिक, सीरियल चाह, बटहर , टिटही, पंतवा, बगुला, मंचरंगा और भी बहुत है जो हमें  सीताउद्दीन जी ने लिखाये हैं। 
            अंततः हम यह कहना चाहेंगे की आप यहाँ नवम्बर से लेकर मार्च के बीच जरूर आयें और इस झील का तथा इस पक्षी विहार का आनंद उठा सकें। हम बिहार सरकार से भी इस झील को और बेहतर बनाने क़ि अपील करते हैं। मनिहारी वासियों के ओर से भी इसे बेहतर बनाने तथा इसे विकशित करने क़ि गुजारिस करतें हैं। 
                                                                    अधिक जानकारी के लिए कृपया Gogabil Jhil की वेबपेज पर जाए। 
                                                                                                                      
                                                                                                                  टिंकू कुमार चौधरी    
                                                                                                                         सहयोगी 
                                                                                                                रुपेश, प्रदीप, उत्तम 
                                                                                                  फोटो संग्रहकर्ता - श्रवन, मृगेंद्र कुमार 







    सोमवार, 8 नवंबर 2010

    गंगा स्नान के लिए मनिहारी में छठव्रतियों का उमड़ा भीड़

    Manihari
    मनिहारी घाट 
    छठ पूजा(मनिहारी) :- छठ बिहार का सबसे पवित्र पर्व के रूप में माना जाने वाला त्योहार है !  मनिहारी में इसका एक अलग ही रूप देखा जा सकता है ! मनिहारी घाट में स्नान करने के लिए छठव्रतियों भीड़ जम चुकी है ! आज मनिहारी में भीड़ को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है की मनिहारी में इसका कितना महत्व  है !कटिहार,अररिया ,किशनगंज, फारविसगंज , पछिम बंगाल , तथा नेपाल से लोग यहाँ छठ के स्नान के लिए आ रहें हैं !  बस स्टैंड से लेकर घाट तक तक पूरा भीड़ ही भीड़ है ! बस स्टैंड के पास प्रशासन व्यवस्था की गयी है ! बस-स्टैंड(मनिहारी) ब्लाक के पास वाहनों को रोकने का प्रबंध किया गया है ! मनिहारी बड़ी लाइन का कार्य प्रगति में होने के कारण अभी कटिहार से सभी छठव्रतियों को बस , टेम्पू, ट्रक, ट्रक्टर, टाटा, मेजिक तथा निजी वाहनों से आना पर रहा  हैं ! रोड में इतनी भीड़ है की कटिहार आने-जाने के लिए वाहनों की कमी पड़ गयी है ! छठव्रती अपने जान को जोखिम में डालकर भी यहाँ स्नान करने के लिए आ रहें हैं ! छठ के लिए दुकाने सज चुकी है ! दुकानों में भीड़ को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है, की मनिहारी में छठ के के स्नान के लिए कितना प्रसिद्ध है !

                                                                                                           टिंकू कुमार चौधरी
                                                                                                                  मनिहारी
                                                                                                          



    गुरुवार, 4 नवंबर 2010

    दीपावली की शुभकामनाये

    Manihari
    हम निवासी हैं भारत देश के और यह देश धर्मपरायण देश है ! यह वही देश है जहाँ प्रभु श्रीकृष्ण ने जन्म लिया था, यह वही भूमि है जहाँ रावण का वध करने वाले श्रीरामचंद्र ने जन्म लिया था, यह वही भूमि है जिसने भगवन बुद्ध को जन्म दिया, और यह वही धरती है जिसने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले हमारे राष्ट्रीय पिता महात्मा गाँधी को जन्म दिया ! 

                                                                                                                "तमसो माँ ज्योतिर्गमय"

                                                 भारत देश में सभी धर्मो के लोग रहतें हैं और सभी मिलजुलकर सभी पर्वों को मनाते हैं! दीपावली इनमे से ही प्रमुख है! दीपों का पर्व दीपवाली अंधकार को मिटाने का प्रतिक है ! कार्तिक महीने के अमावस्या को यह पर्व मनाया जाता है! कहते हैं इसी दिन प्रभु श्री रामचंद्र जी रावण का वध करके अयोध्या लौटे थें! उन्हीं के आने क़ि ख़ुशी में अयोध्या के साथ-साथ समस्त भारत में घी के दिए जलाये गए ! उसी दिन से दीपावली मनाया जाने लगा ! 
                               दीपावली के दिन शाम होते ही असंख्य दीपक जगमगा उठते हैं ! बच्चे अतिसबाजियां शुरू कर देते हैं, आवाज के कारण मानो कान के परदे फटने लगते हैं ! 7-8 बजे रात तक पूजा शुरू हो जाती है ! पूजा करने के बाद लोग अपने दोस्त बंधू को मिठाई खिलाते हैं और खुद खाते हैं! जितना दीपावली के अवसर पर उत्साह देखने को मिलता है, शायद उतना उत्साह किसी त्योहार में देखने को मिलता हो!
                              हम अपने सभी पाठकों को दीपावली क़ि बधाई देना चाहते हैं! दीपावली को दिए के साथ मनाये न क़ि प्रदुषण फ़ैलाने वाले पटाखों से! जरा सोचिये पटाखों से कितनी हानिकारक धुएं निकलतें हैं और हमारे वातावरण को प्रदुषित करता है! इसलिए दीपावली दीयों के साथ मनाये !  

                                                                                                                           टिंकू कुमार चौधरी