Wednesday, November 17, 2010

गोगाबील झील कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड से 8 क़ि० मी० दूर स्तिथ है ! इस पक्षी विहार में धनुषाकार झील (ox-bow lake) है, जिसका नाम गोगाबील है उसी के नाम पर इस पक्षी विहार का नामांकरण हुआ ! 1990 ई० में  यहाँ आने वाले पक्षियों की बड़ी  संख्या को देखकर इसे पक्षी विहार घोषित किया गया !
झील 
                                                     इसका क्षेत्रफल 217.99 एकड़ है ! इस झील के चौहद्दी इस प्रकार हैं ! पूरब में बनगंवा, पश्छिम में मरुआ ,(भेड़ीयाही) , उत्तर में नीमा, एवं दक्षिण में सुरापारटाल है ! इस झील क़ि सबसे बड़ी बात यह है की यहाँ रूस तथा अन्य देशो से लगभग 300 प्रकार के पक्षी यहाँ पहुचते  है ! लाल रीवाले ग्रीव, पोटचार्ड , स्पाटवील , टील ,कूट , और ब्रहुमानी हंस प्रमुख हैं ! 
बगुला के प्रजातियाँ 
                  यहाँ की देखरेख करने के लिए C.G GUARD मो० सीताउद्दीन को नियुक्त किया गया है ! वे सुरापार टाल  के  निवासी हैं !1995 से इनको जन-लक्ष्य  संस्था विनोदपुर (कटिहार) के द्वारा कार्य पर लगाया गया है ! 750 रु प्रतिमाह आने जाने का किराया तथा इनको और इनके परिवार वालों को मेडीकल की सुविधा उपलब्ध है ! जब हमारे टीम ने इनसे बात की तो इन्होने बताया की इनको झील के पास निगरानी रखने के लिए एक आवास तथा नाव की जरूरत है ! इनका कहना है की घर से आने जाने में बहुत दिक्कत होती है ! इनके यहाँ न होने पर लोग मछलिया भी मारने लगते हैं जिससे यहाँ आने वाले पक्षी हरककर भाग जाते हैं ! जिससे पक्षियों की संख्या में कमी हो जाती है ! 
बनभोज करते लोग 
               हरेक महिना यहाँ एक बार भागलपुर से पानी जांचकर्ता आतें हैं ! अपनी जांच  प्रक्रिया के दौरान वे पुरे झील का सर्वेक्क्षण करते हैं और सर्वेक्षण करने के पश्चात वे पुनः चले जातें हैं ! मो० सीताउद्दीन जी से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया की जनवरी, फ़रवरी, मार्च , अप्रेल में पक्षियों की कलरव मन को अति प्रशन्न कर देता है ! पक्षियों की इतनी अनेक प्रकार और संख्या शायद ही कहीं देखने को मिलता हो ! वे पक्षियों के पूरा नाम ही हमें बता दिए जिनमे  से हम कुछ नाम यहाँ लिख रहे हैं ! लालसार , पेंटल, पचार, डोकहर, बड़ा सिलिक, छोटा सिलिक, सीरियल चाह, बटहर , टिटही, पंतवा, बगुला, मंचरंगा और भी बहुत है जो हमें  सीताउद्दीन जी ने लिखाये हैं !
                                    अंततः हम यह कहना चाहेंगे की आप यहाँ जनवरी से लेकर अप्रैल के बीच जरूर आयें और इस झील का तथा इस पक्षी विहार का आनंद उठा सकें ! हम बिहार सरकार से भी इस झील को और बेहतर बनाने क़ि अपील करते हैं ! मनिहारी वासियों के ओर से भी इसे बेहतर बनाने तथा इसे विकशित करने क़ि गुजारिस करतें हैं !
                                                                                                 लेखक 
                                                                                                              टिंकू कुमार चौधरी    
                                                                                                                     सहयोगी 
                                                                                                            रुपेश, प्रदीप, उत्तम 
                                                                                              फोटो संग्रहकर्ता - श्रवन, मृगेंद्र कुमार 







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4 comments:

  1. बहुत बढ़िया जानकारी

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  2. thanks for this information..... :)

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  3. सचमुच अदभूत जगह है

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  4. बहुत अच्छी जानकारी दी लेखक ने !

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